पटना से गोपाल. रामविलास पासवान का निधन हो गया है. गुरुवार 8 अक्टूबर, 2020 को अंतिम सांस ली. इस सूचना के साथ ही राजनीति के एक युग का अंत हो गया. बिहार की पृष्टभूमि से आने वाले रामविलास पासवान ने बतौर रेलमंत्री कई ऐसे कार्य किये जो आज भी बदलाव के पहचान बन चुके हैं. इनमें से एक था नये जानों का गठन. प्रशासनिक रूप से तेजी से फैसले लेने के लिए इन जोनों का गठन किया गया था. गठबंधन सरकारों के दौर में जून 1996 में एचडी देवेगौड़ा की सरकार में रामविलास पासवान ने रेल मंत्री का कार्यभार संभाला था.
एक-दो साल इस कार्यकाल में उन्होंने रेलवे में कई सुधारात्मक कार्य किये जो आज उनकी पहचान बन गये है. बिहार से आने वाले इस नेता ने कई उपलब्धियों रेलवे के माध्यम से बिहार को दी. इलाहाबाद, जयपुर, बैंगलोर, हाजीपुर, जबलपुर और भुवनेश्वर में रेलवे मुख्यालय के रूप में छह नए जोन का निर्माण भी इसमें शामिल था. बैंगलोर का मुख्यालय हुबली में स्थानांतरित कर दिया गया था.
पासवान के कार्यक्राल में ही जम्मू और कश्मीर और उत्तर पूर्वी राज्यों में नई लाइनों को बिछाकर लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा गया. उन्होंने मीटर गेज / संकीर्ण गेज लाइनों का रूपांतरण किया. ब्रह्मपुत्र नदी पर बोगीबिल ब्रिज, पटना में गंगा ब्रिज की शुरुआत उनके रेल मंत्री काल में ही हुई थी.
रेलमंत्री के रूप में रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) की स्थापना की पहल भी उनकी कार्यकाल में की गयी थी जिसका विस्तारित रूप अब सामने है. रेलमंत्री के रूप में रामबिलास पासवाल के कार्यों का देश याद रखेगा तो उनके निधन से जो स्थान रिक्त हुआ है उसे शायद कभी नहीं भरा नहीं जा सकेगा.
पूर्व रेलमंत्री को विनम्र श्रद्धांजलि
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