- SER/GM का टाटानगर-आदित्यपुर व सीनी का दौरान तनावमुक्त वातावरण में पूरा हुआ
- डीआरएम के आक्रोश से सकते में आये ऑपरेटिंग के अफसर, नहीं सूझ रहा था जवाब
JAMSHEDPUR. दक्षिण पूर्व रेलवे के जीएम (#GM_SER) का 12 अगस्त 2023 को चक्रधरपुर रेलमंडल का दौरा शनिवार की शाम काफी सौहाद्रपूर्व माहौल व तनावमुक्त वातावरण में पूरा हो चुका था. डिवीजन से लेकर जोन के अधिकारी राहत महसूस कर रहे थे कि जीएम के दौरे में ऐसी कोई बात नहीं हुई जिससे माहौल तनावपूर्ण हो. जीएम टाटानगर से रवाना होने को तैयार थे. कहां जाता है कि अंत भला तो सब भला… लेकिन अंत में ‘रंग में भंग’ पड़ ही गयी.
आलम यह रहा कि आम तौर पर शांत और चेहरे पर हमेशा मुस्कान बिखेरने वाले डीआरएम/चक्रधरपुर #DRM_CKP भी अपने को नहीं रोक सके और उनका गुस्सा फूट पड़ा. बात ही कुछ ऐसी थी. टाटानगर स्टेशन पर जीएम सबसे विदा लेकर शाम 6.25 में अपने विशेष ट्रेन में सवार हो चुके थे. सभी सिग्नल मिलने का इंतजार कर रहे थे. सेकेंड की सुई मिनटों को पार करने लगी लेकिन जीएम स्पेशल ट्रेन को सिग्नल नहीं मिला. डीआरएम ने कारण पूछा तो बताया गया #SER/GM स्पेशल के पहले कंट्रोल ने गुड्स ट्रेन को छोड़ दिया है.
अब इंतजार के अलावा कोई रास्ता था नहीं. ”हम नहीं सुधरेंगे” की तर्ज पर वहीं हुआ था जो हर दिन आम यात्री ट्रेनों के साथ होता है. पैसेंजर और एक्सप्रेस के आगमन से ठीक पहले गुड्स को रवाना कर दिया जाता है. एक दिन पहले ही चक्रधरपुर कंट्रोल के इसी कारस्तानी का खामियाजा आम लोगों को घंटों भुगतना पड़ा था जब यात्रियों ने चक्रधरपुर-टाटा मेमू को गम्हरिया में रोककर जमकर हंगामा मचाया. बताया जाता है कि मेन लाइन से गुड्स को तीन नंबर पर सिग्नल देने के कारण जीएम स्पेशल को रोकना पकड़ा.
कुछ देर तो डीआरएम/सीकेपी आक्रोश को दबाते रहे लेकिन आखिरकार उनका गुस्सा फूट पड़ा. डीआरएम ने प्लेटफॉम पर ही ऑपरेटिंग के अफसरों की क्लास लगा दी. सीनियर अधिकारी से स्टेशन डाॅयरेक्टर और स्टेशन उपाधीक्षक तक इधर-उधर झांकने लगे. ऑपरेटिंग के अफसरों को कोई जवाब नहीं सूझ रहा था. आखिरकार आनन-फानन में जीएम स्पेशल को 6.45 में सिग्नल मिला. जीएम स्पेशल के रवाना होने के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली.
खैर.. इसके बाद डीआरएम तो सीकेपी रवाना हो गये, लेकिन अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गयी है कि जब जीएम स्पेशल का समय निर्धारित था तो बिना सक्षम अधिकारी से अपडेट लिये कंट्रोल से कैसे उसी मार्ग पर गुड्स को रवाना कर दिया गया ? मार्ग में कौन से बाधा थी कि जीएम स्पेशल को रोका गया? इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार है ? अब अधिकारी खुद को बचाने में दूसरे को दांव पर लगाने की रणनीति बनाने में जुट गय है. डीआरएम के आक्रोश की गाज किस पर गिरती है ? अब तो आने वाला समय ही बतायेगा…
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