- स्वतंत्रता दिवस के साथ एआईआरफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने रेलकर्मियों के बीच मनाया 71वां जन्मदिन
- निजीकरण के विरोध में रेलकर्मियों से आह्वान, कहा- हम हार मानने वालो में से नहीं, मुकम्मल लड़ाई लड़ेंगे
रेलहंट ब्यूरो, नई दिल्ली
ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस के दिन अपना 71वां जन्मदिन मनाया. इस अवसर पर एनआरएमयू मुख्यालय के टीएन वाजपेयी सभागार में आयोजित विशेष कार्यक्रम में रेलकर्मियों ने रक्तदान भी किया. इस मौके पर महामंत्री ने दोहराया कि अगर सरकार सरकार ट्रेनों को प्राईवेट ऑपरेटर को दिए जाने के मुद्दे को बातचीत से हल नहीं करेगी तो फेडरेशन पूरी ताकत से सरकार का विरोध करेगा. उन्होंने कहा कि इस समय भारतीय रेल और कर्मचारियों दोनों के सामने कठिन चुनौती है. सरकार कोई भी हो, सब की नजर भारतीय रेल के निजीकरण पर लगी रहती है, लेकिन एआईआरएफ के सख्त विरोध की वजह से अब तक यह प्रयास सफल नहीं हो सका.
आज कोरोना महामारी के माहौल में जब पूरा देश लाँकडाउन था, रेलकर्मी जान जोखिम में डालकर मालगाड़ी, पार्सल ट्रेनों का संचालन कर रहे थे, मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में लगे थे तब सरकार ने डीए फ्रिज कर दिया. जब हम उसका विरोध कर रहे थे तभी बड़ी संख्या में पोस्ट सरेंडर की कार्रवाई शुरु कर दी गई, जब हमने इसका विरोध शुरू किया तो सरकार ने अपने गुप्त एजेंडे को बाहर निकाला और कई प्रमुख मार्गों पर प्रीमियम ट्रेनों के संचालन के लिए प्राईवेट ऑपरेटर को आमंत्रित कर दिया. यह वह मौका है जब रेलकर्मचारी कोरोना महामारी के बीच घर परिवार की चिंता किए बिना ट्रेनों का संचालन करने में लगे हुए थे, तब संकट की इस घड़ी को रेल मंत्रालय ने अवसर में बदला और कर्मचारी विरोधी कार्यों को अंजाम दिया. महामंत्री ने कहाकि हम घबराने वाले नहीं है, हम बातचीत का रास्ता बंद नहीं करेगे, लेकिन अपनी मांगों को लेकर पूरी ताकत से लड़ेगें. अगर सरकार बातों से मान गई तो ठीक है, वरना मुकम्मल लड़ाई लड़ी जाएगी.
इस मौके पर एनआरएमयू के अध्यक्ष एसके त्यागी ने सरकार को कथनी और करनी के अंतर पर घेरा. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने रेलकर्मियों को फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स घोषित किया था लेकिन रेल मंत्रालय कोरोना वारियर्स की सुविधाओं से रेलकर्मियों को वंचित कर रहा. कठिन हालात में ड्यूटी के दौरान लगभग 146 रेलकर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जिन्हें दूसरे कोरोना वारियर्स की तर्ज पर 50 लाख का एक्सग्रेसिया अभी तक एनाउंस नहीं किया गया . यह दुखद स्थिति है.
सरकार की कथनी और करनी के अंतर है. प्रधानमंत्री ने रेलकर्मियों को फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स घोषित किया था लेकिन रेल मंत्रालय कोरोना वारियर्स की सुविधाओं से रेलकर्मियों को वंचित कर रहा. कठिन हालात में ड्यूटी के दौरान लगभग 146 रेलकर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जिन्हें दूसरे कोरोना वारियर्स की तर्ज पर 50 लाख का एक्सग्रेसिया अभी तक एनाउंस नहीं किया गया . यह दुखद स्थिति है.
एसके त्यागी, अध्यक्ष, एनआरएमयू
कार्यक्रम में मौजूद कोरियन एंबेसी के डिप्टी चीफ मिशन जांगहो चोई ने दोनों देशों के निकट संबंधों को याद किया और बताया कि हम बहुत ही आधुनिक तरीके से ट्रेन का संचालन करते है और काफी कुछ स्वयं बनाते है. आईटीएफ एशिया पैशेफिक के सहायक महामंत्री संगम त्रिपाठी ने इस मौके पर कहा कि यह बड़ा उदाहरण जब कठिन दौर में न सिर्फ मास्क, सेनेटाईजर, वेंटिलेटर तैयार किए किये गये, बल्कि विपरीत हालात से निपटने के लिए पांच हजार रेल कोच को आईसोलेशन वार्ड में तब्दील कर दिया गया. इस मौके पर मौजूद रेलवे बोर्ड में डीजी एचआर आनंद खाती ने कहाकि आज भारतीय रेल की आर्थिक हालात ठीक नहीं है इसलिए कई बार कुछ फैसले प्रबंधन के नजरिए से लेना मजबूरी होती है. रेलवे बोर्ड ओवर स्टाफ को लेकर परेशान है और कर्मचारियों से भी राय ले रहा ताकि रेल के बेहतर संचालन पर योजना बना सकें.
इस मौके पर केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीना सिंह, मंडल मंत्री अनूप शर्मा, मंडल अध्यक्ष राजेन्द्र भारद्वाज, वीपी चौधरी, अजित चौधरी, विक्रम सिंह, सुधीर शर्मा, पवन कुमारी, दिव्या शर्मा, सुनीता उज्जैनवाल, नीना यादव समेत बड़ी संख्या में रेलकर्मी मौजूद थे.
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